प्रभात संगीत क्रमांक 674

Songs of New Dawn by Shri Shri Anandamurti Ji

प्रभात संगीत क्रमांक 674

 

 

आमि गेँथे रेखेछि ए फुलेर माला

तोमार तरे शुधु तोमार तरे।

प्राणेर कथा विरहेर व्यथा

आछे भरे एते आछे भरे।।

 

ग्रीष्मे दावदाहे उष्ण वाय़े

जखन प्राणीनता प्रति पले काँदे।

मोर हियार वीणा तव रागे साधा

भासाइ गानेर भाङ्गा भेला तोमार सुरे।।

 

शरत शेफालीर सुगन्धे भरा

जगत जबे थाके मातोय़ारा।

तव अनुरागे भेङ्गे नीरन्ध्र कारा

आमि बाहिरिया जाइ अचिन्‌ दूरे।।

 

अर्थ:

हे प्रभु! यह फूलमाला मैंने पिरो कर रखी है तुम्हारे लिए, केवल तुम्हारे लिए। मेरी सारी भावनाएँ और मेरी विरह की पीड़ा इसमें भरी हुई हैं।

ग्रीष्म ऋतु की भीषण तपिश और गर्म हवाओं जैसे सांसारिक क्लेश के बीच, जब जीवनी–शक्ति हर पल क्रंदन करती है, मैं अपने हृदय की वीणा को तुम्हारे राग पर साध कर मेरे गीत का टूटा हुआ बेड़ा तुम्हारे सुर पर तैराता/ तैराती हूँ।

शरद ऋतु के शेफाली की खुशबू से भरपूर जगत जब मतवाला रहता है, तुम्हारी भक्ति से मेरे जागतिक बंधन का सघन कारा टूट जाता है और मैं अनजान दूर आध्यात्मिक जगत में बह जाता/ जाती हूँ।

 

सौजन्य – सुप्रिया दीदी