प्रभात संगीत क्रमांक 135

Songs of New Dawn by Shri Shri Anandamurti Ji

 

 

जन्मदिने एइ शुभ क्षणे

प्राणभरा अपार आनन्दे,

अणुते अणुते प्रति परमाणुते

दोला लागे नव वर्णे गन्धे।।

 

खुशीते विभोर आपन हारा,

सबाकार मन आवेशे भरा,

उद्वेल हिया तोमारी लागिया

नेचे’ चले मोहन छन्दे।।

 

भालबेसे’ एसेछो काछटिते रयेछो,

आलोर छटाय आछो सबार आनन्दे।।

 

अर्थ:

 

जन्मदिन का यह शुभ क्षण, प्राण को अपार आनन्द से भर देता है और प्रत्येक अस्तित्व, अणु-परमाणु नये रंग-गन्ध के साथ दोलायमान हो जाते हैं।

 

अपार खुशी में विभोर होकर अपनापन खो जाता है, सबका मन मस्त हो जाता है। तरंगायित हृदय तुम्हारे स्पन्दन में मोहन छन्द में नाचने लगता है।

 

सबको प्यार करने के लिए आये हो, तुम अति निकट हो और तुम प्रकाश ही प्रकाश हो। तुम से सब कुछ और सभी आनन्दित हैं, प्रभु।