Dr Ashu didi
जिनसे आकाश, पृथ्वी और अन्तरिक्ष अनुस्युत हुए है, मन, पञ्चप्राण और इन्द्रिय-समूह जिनके बीच ही स्थित हैं, हे साधक, तुम केवल उन्हें जानने की चेष्टा करो, उनको जानने की चेष्टा के अतिरिक्त अन्यान्य समी अवान्तर बातों का त्याग कर दो। तुम हो मरणशील, मृत्यु के दास। अमृतत्व में प्रतिष्ठित होने की तुम्हारी शाश्वत आकांक्षा है और वे ही हैं उस अमृतत्व तक पहुँचाने वाले सेतु। अतः केवल उनको जानने से ही तुम्हारा वास्तविक कल्याण होगा। “वेद में ब्रह्मविज्ञान-2”
श्रीश्री आनन्दमूर्ति
कभी कभी पुज्य बाबा ने खाने पीने सम्बन्धी बहुत सी आवश्यक बातें बताया करते थे। कलकत्ता में एक बार प्रभु ने मीठा आहार ग्रहण करने से होने वाली हानियों पर प्रकाश डालते हुए निम्नलिखित बातें बतायी ।
मीठा आहार ग्रहण करने से हानि :-
२५ वर्ष आयु के बाद मीठा कम खाना चाहिए क्योंकि उससे निम्नलिखित हानिया है।
१. जल्द बूढ़ा होना ।
२. जल्द कमजोर होना ।
३. डायबीटीज (मधुमेह हो जाना)
४. सोचने की शक्ति का ह्रास हो जाना ।
– डायबटीज की दवा (मधुमेह) पर चर्चा करते हुए बाबा ने जो घरेलू उपचार बताया वह इस प्रकार है:-
(१) नीम की पत्तो और बैंगन मिलाकर उसका भाजा बनाकर भोजन के समय पहले ग्रहण करना।
(२) कच्चा करेला को चूर कर रस निकाल कर प्रत्येक सुबह खाली पेट मे लें।
(३) सप्ताह में दो दिन नीम की पत्ती खाना। अधिक नीम की पत्ती (तिवत) नहीं खानी चाहिए । अधिक खाने से पेट में शूल, भूख में कमी होती है। परन्तु डायबीटीज वालो को कुछ नहीं होगा।
खाने में चुनाव: (खाने की किस चीज को किस क्रम में खाना चाहिए)
१. तीत- करेला, नीम का पत्ता ।
२. कडुआ-काली मिर्च से लार, (SALIVA) ज्यादा बनता है जो डायबीटीज के लिए गुणकारी है। सुखी मिर्च से लाल मिर्च अच्छा, लाल मिर्च से हरी मिर्च अच्छा और हरी मिर्च से काली मिर्च अच्छा होता है।
३.कसाय केले का फूल, कच्चा केला, गुलड़, सहजन का फूल एवं फल, बथुआ, नोनी साग ।
४. लवण- कच्चे फल के सिवा उपर से लवण (नमक) का व्यवहार नहीं करना।
५. अम्ल- नीबू, दही, खट्टा फल (कच्चा) आम, वेल, आंवला, इमली ।
कच्चा और मीठा फल के ग्रहण करने में कोई अन्तर नहीं होता। कच्चा फल लवण के साथ लेना चाहिए, जिसका पेट ठीक है रात में दही खा सकता है। कच्चा वेल पक्के वेल से ज्यादा गुणकारी है उसे आग में पका कर खाओगे ।
६. मीठा बहुत क्षुधा होने पर खाने के बाद थोडा (एक चम्मव खा सकते हो।
७. मौसमी नारगी से ज्यादा अच्छा होता है।
– तेल लीवर को खराब करता है तेल जितना ही कम हो उतना ही अच्छा है। बाजारु पकोडो वगैरह नहीं खायोगे। बधिक घी, तेल की तरह लीवर को खराब करता है।
घृतं बुद्धि बलं
दुग्धे लावण्य बद्धि
शाके बद्धि मलं
कठ जामुन खूब खाओगे। कठ जामुन पीस कर मधु के साथ खाने से लीवर की खराबी दूर हो जाती है।
– मेथी को पानी में फुलाकर उस पानी को छानकर पिलाने से जिनका पेशाच बन्द हो गया है ठीक हो जायगा।
– जिसको अधिक प्यास लगती है। भिगोये मेथी को कपड़े की पोटली बना कर चूसने से ठीक हो जाएगा।
