प्रभात संगीत क्रमांक 2249

Songs of New Dawn by Shri Shri Anandamurti Ji

फागुन एलो मने ना जानिये, मनवने फुल साजिये।
शुष्क विशीर्ण मन माझे, सरस छवि एँके दिये।।

जे शाखाय छिलो ना कोनो फुल, छिलो ना पाता छिलो ना मुकुल।
ताहाते सबुज पाता एने दिये, फुलेर शोभा दिले भरिये।।

जे मनने छिलो ना कोनो मधु, जे आकाशे छिलो ना विधु।
चिरकालेर सेइ जे बँधु, ताकेओ निये एले पथ भुलिये ।।

 

अर्थ:

बसंत (फागुन) मेरे मन में मुझे मालूम हुए बिना ही आ गया
और मेरे मन उपवन को फूलों से सजा दिया।
मेरे सूखे व खंडित से मन में इसने एक सुंदर छवि अंकित कर दिया। 
वे शाखाएँ जो फूलों से विहीन थीं,
जिनमें न तो पत्तियाँ थीं और न ही कलियाँ,
तुम उनमें हरी पत्तियाँ ले आये और फूलों से सुशोभित कर दिए। 
जिस मन में कोई मधुरता नहीं थी,
वह आकाश जिसमें चाँद नहीं था,
रास्ता भूलकर वो बंधु जो शाश्वत साथी हैं,
यह सब कुछ जो न था
वे अपने साथ ले कर आ गए।
Sent By Supriya didi