मानवीय धर्म और कर्म
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देख प्रेम से सारी दुनिया, बहे प्रेम की धार हो ।
नफरत त्यागो आप हृदय से, मधुर लगे संसार हो ।।
दूर करो सब अज्ञानता को, जलते ज्ञान प्रकाश जी ।
जगे हिया में परहित भावे, होते दिव्य उजास जी ।।
परमपिता के सारे बच्चे, भेद नहीं जग द्वार जी ।
जात पात के बंधन दिल से, तोड़ो सारे बार जी ।।
सोच जरा हिय में तुम मानव, क्यों आए संसार में ।
सजे धरा पर नफरत लड़ियाँ, जलते सब भंसार में ।।
देख सभी अब अंतस मन में, दूर करो दुष् भाव को ।
भरो हृदय में रंग प्रेम की, रख रंगीला चाव को ।।

करो ईश की नित्य साधना, हिया बने विभु धाम जी ।
नष्ट करो मन तुच्छ भावना, होते मंजुल काम जी ।।
सेवा करना जग की मन से, जगे सदविप्र भावना ।
रहे संगठित सारे मानव, हो दिल सुंदर कामना ।।
एक जात हो जग में बिल्कुल, बने महामनु धाम हो ।
जात पात का भेद मिटेजग, रहते हृदय में श्याम हो ।।
ब्रह्म रूप देखे कन कन में, समझे रूप भगवान की ।
सारे जन की हो दिल सुंदर, दिखे रूप इंसान की ।।
अर्थव्यवस्था बने विकेंद्रित, धन हो सबके पास जी ।
जोर किसी का नहीं चलेगा, यह तो सबके खास जी ।।
आपस में जब सभी लड़ेंगे, बने वेश्य मजबूत जग ।
परमपिता के निर्धन बच्चे, धरे प्रगति की राह पग ।।
यह बेईमानी नहीं चलेगी, पूंजी पति हो नष्ट जी ।
दुरुपयोग करे जग धन का, बने बिलासी भ्रष्ट जी ।।
निर्धन देशों को लड़वाते, करते जग में राज जी ।
करें विरोधें मिलकर उनकी, सबक सिखा दे आज जी ।।
बेच बम मिसाइलों हरदम, बनते हैं धनवान जी ।
पंच बने कुछ राष्ट्र विश्व के, रखते अपना शानजी ।।
बने करवाँ मनुज जाति की, मिलकर करें विरोध जी ।
काला धन पनपे नहिं जग में, करो सदा अवरोध जी ।।
जब सब मानव जग जाएँगे, पहचाने निज धर्म को ।
सद विप्र समाजें स्थापित हो, करें सभी शुभ कर्म को ।।
परमपिता आनंदम मूरत, प्रऊत दिए महान जी ।
इस दर्शन को लागू करके, विकसित करो जहान जी ।।
अन्न वस्त्र आवास सभी के, शिक्ष चिकित्सा पास हो ।
जिए सभी आराम जिंदगी, करते पूरी आस हो ।।
मंगलमय हो जीवन सबका, भींगे सुख बरसात में ।
करते सब शुभ कर्म अनोखा, विमल चाँदनी रात में ।।
झिलमिल तारे गगन निराले, चमके सब आकाश में ।
फैले धरती भक्ति रोशनी, रहते गुरू सकास में ।।
प्रऊत दर्शन भव्यअनोखा, स्थापित हो जग धाम में ।
चढ़कर ऐसे दिव्य झरोखा, रमे हृदय नित राम में ।।
सुंदर कुमारी
समस्तीपुर ।🙏🏽🌸🌸🌹🙏🏽

समय की लम्बी कतार
समय समय की मार हैं
जनता भी लाचार हैं
लम्बी लम्बी कतार हैं
देश में मचा हाहाकार हैं
कभी नोट पर वार हैं
कभी नोट बंदी की कतार है
देश में सस्ता कुछ भी नही
महंगाई ही बार बार हैं
जब से सबका साथ हैं
तब से ही विकास हैं
यही सरकार का नारा हैं
आज गैस सिलेंडर के लिए
आम जनता मारा मारा हैं
दिन भर चाय की चुस्की खत्म हैं
अब लोग कहते डाइट पर हम हैं
बीवी कहती गैस खत्म हैं
पति कहता लम्बी कतार में हम हैं
सब करते अपनी बारी का इंतजार है
गैस एजेंसी पर लंबी-लंबी कतार है
गैस बुकिंग का नंबर नहीं आया हैं
दिन खत्म फिर लाइन लगाया हैं
हर दिन यही दिनचर्या अपनाया है
अगले दिन बुकिंग करवाया है
पैंतालीस दिनों में गैस पाया है
तब जाकर खुशहाली घर आया है
अब खाने में करनी ना इंतजार है
मिल गया सिलेंडर हमको भी इस बार है
ऐसी भाव में, सब घर-घर जिया है
गैस खत्म होने का घूट पिया है
जाने अब कौन सी आगे लगेगी कतार है
देश में पेट्रोल और डीजल का भी मारा मारा है
आम आदमी का भी गैस, डीजल ,पेट्रोल पर ही तो रोजगार है
डीजल, पेट्रोल के बिना किसान भी लाचार है
हम सब भारतवासियों का सरकार से गुहार है
दुनिया का दम घूट रहा है
कुछ देशों की लड़ाई के बीच
मित्रता का दामन छूट रहा है
कब अच्छा दिन आएगा
जनता सारा पूछ रहा है
इन लंबी कतारों से देश में हाहाकार है
ना जाने कब तक यह लंबी-लंबी लगी कतार है
जल्दी ही खत्म हो जाए देश की ए सारी समस्या
यही मेरी गुहार हैं यही मेरी पुकार है
रचनाकार –
सरिता मौर्य
कुशीनगर उत्तर प्रदेश
