श्रीमती संगीता जायसवाल
“अंगिका समाज” नाम प्राचीन अंग देश की भाषा, संस्कृति और सामाजिक विरासत से जुड़ा है। प्राचीन अंग देश का संबंध मुख्यतः वर्तमान भागलपुर, बांका, मुंगेर, खगड़िया, जमुई, पूर्णिया, कटिहार तथा आसपास के क्षेत्रों से माना जाता है। इस क्षेत्र की पारंपरिक भाषा अंगिका है, जो केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि यहाँ की लोक-संस्कृति, लोकगीत, परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामुदायिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए अंगिका भाषा और संस्कृति से जुड़े व्यापक सामाजिक समुदाय को “अंगिका समाज” कहा जाता है। सरल रूप में: अंग देश → अंगिका भाषा → अंगिका संस्कृति → अंगिका समाज। यह किसी एक जाति का नहीं, बल्कि साझा भाषाई-सांस्कृतिक पहचान का नाम है।
कृष्ण-पूर्व एवं प्राचीन काल से जुड़े प्रसिद्ध व्यक्तित्व
अंग क्षेत्र की प्राचीन परंपरा अनेक महान ऋषियों, राजाओं और विद्वानों से जुड़ी है। ऋषि अंगिरा और ऋषि च्यवन वैदिक परंपरा के प्रमुख ऋषि माने जाते हैं। राजा रोमपाद और ऋष्यशृंग का उल्लेख रामायण परंपरा में मिलता है, जबकि अंगराज कर्ण महाभारत से जुड़े प्रसिद्ध व्यक्तित्व हैं। बाद के काल में सरहपा ने सिद्ध एवं साहित्यिक परंपरा को समृद्ध किया। आधुनिक युग में तिलका मांझी, महर्षि मेही परमहंस, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ और नंदलाल बोस ने स्वतंत्रता, अध्यात्म, साहित्य और कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस क्षेत्र की समृद्ध अंगिका सांस्कृतिक विरासत है, जिसकी जड़ें प्राचीन अंग महाजनपद से जुड़ी हैं। यह क्षेत्र अंगिका भाषा एवं लोक परंपराओं, विक्रमशिला महाविहार, चंपापुरी की जैन विरासत, मंदार पर्वत, भागलपुर सिल्क, पारंपरिक संगीत, त्योहारों, हस्तशिल्प तथा कृषि-आधारित ग्रामीण संस्कृति के लिए जाना जाता है। झारखंड और नेपाल से इसकी निकटता ने यहाँ एक विविध एवं समृद्ध सांस्कृतिक समन्वय को भी जन्म दिया है।
भाषा के प्रति प्रेम
इस क्षेत्र के लोगों में अंगिका भाषा के प्रति गहरा प्रेम और भावनात्मक जुड़ाव है। अंगिका केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि यहाँ की पहचान, संस्कृति, लोकगीत, लोककथाओं और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नई पीढ़ी तक भाषा और इसकी समृद्ध विरासत को पहुँचाने तथा संरक्षित करने की भावना भी मजबूत है।
पारिवारिक मूल्य
इस क्षेत्र में परंपरागत रूप से पारिवारिक एकता, बड़ों का सम्मान, आपसी सहयोग और सामुदायिक संबंधों को विशेष महत्व दिया जाता है। संयुक्त परिवार की परंपरा, बच्चों एवं बुजुर्गों की देखभाल, अतिथि-सत्कार तथा पारिवारिक एवं सामाजिक समारोहों में सहभागिता यहाँ के महत्वपूर्ण मूल्य हैं। महिलाएँ परंपराओं के संरक्षण, परिवार के संचालन तथा पारिवारिक और सामुदायिक मूल्यों के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अंगिका क्षेत्र: संक्षिप्त जनसांख्यिकीय चित्र
मानचित्र में दर्शाए गए भौगोलिक क्षेत्र की अनुमानित जनसंख्या लगभग 2.25 करोड़ है, इसमें लगभग 1.08 करोड़ महिलाएँ और 43–45 लाख बच्चे (0–6 वर्ष) हैं। लगभग 25–30 लाख आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हो सकती हैं। इनमें लगभग 15–18 लाख महिलाएँ कृषि एवं संबंधित कार्यों में संलग्न हो सकती हैं।
समृद्ध विरासत के बावजूद पिछड़ेपन के कारण
समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के बावजूद समाज अपेक्षित विकास नहीं कर सका। इसके प्रमुख कारण शिक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण कौशल की कमी, सीमित रोजगार और आर्थिक अवसर, महिलाओं की कम सामाजिक-आर्थिक भागीदारी तथा कृषि पर अत्यधिक निर्भरता रहे हैं। आधुनिक तकनीक, बाजार और उद्यमिता से जुड़ाव भी अपेक्षाकृत कम रहा। अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत को आर्थिक विकास से जोड़ने के प्रयास सीमित रहे। संगठित सामाजिक नेतृत्व और सामुदायिक प्रयासों की कमी तथा प्रतिभाशाली युवाओं का पलायन भी विकास में बाधक बना। समस्या विरासत की नहीं, बल्कि उसे शिक्षा, कौशल, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और संगठन से जोड़ने की है।
महिलाओं को उनका उचित स्थान क्यों नहीं मिला?
इतनी समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के बावजूद, अंगिका क्षेत्र में महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और निर्णय लेने में भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है। इसका मुख्य कारण पारंपरिक पितृसत्तात्मक व्यवस्था, शिक्षा एवं कौशल के सीमित अवसर, आर्थिक आत्मनिर्भरता और संपत्ति पर अधिकार की कमी तथा घरेलू कार्यों को पर्याप्त मान्यता न मिलना है। रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के अवसर भी सीमित रहे हैं। सामाजिक रूढ़ियों के कारण महिलाएँ सार्वजनिक जीवन और निर्णय प्रक्रिया में पीछे रहीं। समस्या महिलाओं की क्षमता की नहीं, बल्कि समान अवसर, संसाधन, पहचान और नेतृत्व के मंचों की कमी की है।
PROUT में महिलाओं को उचित सम्मान और समान अधिकार
PROUT (Progressive Utilization Theory) के अनुसार समाज में महिलाओं को उचित सम्मान देने का अर्थ केवल उन्हें समान अधिकार देना नहीं, बल्कि उनकी मानवीय गरिमा, स्वतंत्रता, आर्थिक सुरक्षा और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। PROUT लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव का विरोध करता है और महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, आर्थिक संसाधनों, नेतृत्व, समाज-सेवा तथा निर्णय लेने के क्षेत्रों में समान अवसर देने पर बल देता है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना उनके सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण आधार है, क्योंकि आर्थिक निर्भरता शोषण का कारण बन सकती है। साथ ही, महिलाओं के विशिष्ट योगदान और उनकी सामाजिक भूमिका को सम्मान एवं उचित मूल्य दिया जाना चाहिए। PROUT की दृष्टि में महिला और पुरुष दोनों समाज के समान रूप से महत्वपूर्ण अंग हैं; इसलिए एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज वही है जहाँ महिलाओं की गरिमा सुरक्षित हो, उनकी प्रतिभा को विकसित होने का अवसर मिले, उनके अधिकारों की रक्षा हो और वे समाज के निर्माण तथा निर्णय-प्रक्रिया में सक्रिय एवं सम्मानजनक भूमिका निभाएँ।
