Tomar Kache Ami
तोमार काछे आमि
चाइ ना कोन मान
चाइ ना कोन यश-प्रतिष्ठा
नामेर अभिमान
भोरेर आलोय तुमि
साजो रडिन साजे
साँझेर ताराय तुमि
नाच भुमार नाचे
आमार काछे इहाइ
यथेष्ट ये दान
पाखीर गाने आमार काछे
छन्दायित तुमि प्रभु
मेघ मयूर नाचे
लीलायित विश्वविभु
तोमार रूपेर अभिप्रकाश
भराय ये मोर प्राण
Tomár káche ámi
Cái ná kona mán
Cái ná kona jash pratiśt́há
Námer abhimán
Bhorer áloy tumi
Sájo rauṋin sáje
Sáṋjher táráy tumi
Náca bhúmár náce
Ámár káche ihái
Jatheśt́a je dán
Pákhiir gáne ámár káche
Chandáyita tumi prabhu
Megh mayúrer náce
Liiláyita vishvavibhu
Tomár rúper abhiprakásh
Bharáy je mor práń
তোমার কাছে আমি
চাই না কোন মান
চাই না কোন যশ-প্রতিষ্ঠা
নামের অভিমান
ভোরের আলোয় তুমি
সাজো রঙিন সাজে
সাঁঝের তারায় তুমি
নাচ ভূমার নাচে
আমার কাছে ইহাই
যথেষ্ট যে দান
পাখীর গানে আমার কাছে
ছন্দায়িত তুমি প্রভু
মেঘ ময়ূরের নাচে
লীলায়িত বিশ্ববিভু
তোমার রূপের অভিপ্রকাশ
ভরায় যে মোর প্রাণ
भावपूर्ण हिंदी अनुवाद:
तुम्हारे सान्निध्य में रहकर
मुझे कोई अभिमान नहीं चाहिए।
न यश चाहिए, न प्रतिष्ठा,
न नाम-प्रसिद्धि का अहंकार।
प्रभात के प्रकाश में तुम
उज्ज्वल परिधान धारण करते हो;
संध्या के तारों के साथ तुम
ब्रह्मांडीय नृत्य में मग्न होते हो।
मेरी पहुँच में केवल यही है;
तुम्हारा यह उपहार ही पर्याप्त है।
पक्षियों के मधुर गीतों के बीच
तुम, प्रभु, लयबद्ध हो उठते हो;
मेघों के संग मयूर नृत्य करता है।
हे विश्वविभु, हे कृपामय प्रभु,
तुम्हारे सौंदर्य की यह छटा
मेरे जीवन को सराबोर कर देती है।
“मुझे संसार से यश, प्रतिष्ठा या मान-सम्मान नहीं चाहिए। मेरे लिए परम सत्ता का सान्निध्य और उसकी कृपा ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।”
आनन्द मार्ग और नवमानवतावादी दृष्टिकोण से, इसे अहंकार-केंद्रित जीवन से उठकर भक्ति, समर्पण, सार्वभौमिक चेतना और परम सत्ता के साथ एकात्म भाव की ओर बढ़ने की अभिव्यक्ति के रूप में समझा जा सकता है।
