एल.के. अग्रवाल, पटना
शब्दों मे असीमित शक्ति विद्दमान होती है। शब्द दुनिया को उलट-पुलट कर सकते हैं। वे इसे बना भी सकते हैं, या ज़मीन पर गिरा भी सकते हैं। शब्द ब्रह्मांड में कंपन तक पैदा कर सकते हैं तथा यह ब्रह्मांडीय सत्ता को अपनी ओर आकर्षित भी कर सकता है।
जीवन में हम जो कुछ भी करते और महसूस करते हैं, वह शब्दों के उस जाल पर निर्भर करता है जो लगातार हमें घेरे रहता है। प्रोत्साहन के शब्द, जब सही समय पर किसी बच्चे से कहे जाते हैं, तो वे जीवन भर की प्रेरणा बन सकते हैं, जो उसे बड़े होने पर एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करते हैं। किसी सहकर्मी से कहे गए प्रोत्साहन के कुछ शब्द उसमें आत्मविश्वास जगा सकते हैं तथा उसे और ज़्यादा मेहनत करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। वहीं, दुश्मनी से भरे कठोर शब्दों से हुआ नुकसान जीवन भर हमे परेशान कर सकता है। चोट पहुँचाने वाले शब्द कुछ ही पलों में जीवन भर के रिश्ते को खत्म कर सकते हैं, जैसे कि दो लोगों के बीच कभी कुछ था ही नहीं।
बोले गए शब्दों की तो बात ही छोड़िए, यहाँ तक कि हमारे अपने विचार, जब वे हमारे दिमाग में बातचीत के रूप में चलते हैं, तो वे हमारे और दूसरों के बारे में हमारे महसूस करने के तरीके को पूरी तरह से प्रभावित कर देते हैं। हमारा मन लगातार शब्दों की घेराबंदी में रहता है, सकारात्मक और नकारात्मक दोनों। शब्दों की ज़बरदस्त पकड़, उनकी अपार क्षमता, हमारे जीवन को प्रभावित करने की क्षमता, सत्य की खोज करने वाले ऋषियों और मुनियों से छिपी नहीं थी। पुराने ज़माने के ऋषियों ने शब्द के मूल में छिपी शक्ति को पहचाना था। इसलिए कहा जा सकता है की मंत्रों के प्राचीन विज्ञान का जन्म कोई संयोग नहीं था, क्योंकि इसने शब्दों के साथ हमारे जटिल संबंध को पहचाना। शब्द हमारे अंदर और बाहर की दुनिया से हमारा जुड़ाव करने मे समर्थ हैं। यह ध्वनि की ऊर्जा ही तो है, जो हमें अपने आस-पास की ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ती है। हर जीवित प्राणी प्यार से बोले गए शब्दों पर प्रतिक्रिया करता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई कुत्ते को प्यार से बुलाता है, तो वह समझ जाता है और अपनी पूंछ हिलाता है, लेकिन जब कोई उसे गुस्से में डांटता है, तो वह डर के मारे दुबक जाता है।
ब्रह्मांड भी भूमा मानस का एक शरीर स्वरुप है, एक जीवित शरीर, जो अरबों सत्ताओं से बना है। हर ग्रह ब्रह्मांडीय शरीर में एक कोशिका है। चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, हर सत्ता मायने रखती है, क्योंकि अगर आप अनाज के ढेर से एक-एक दाना करके निकालना शुरू करेंगे, तो एक दिन वह ढेर खत्म हो जाएगा। प्रत्येक दाने की उपस्थिति ही ढेर का अस्तित्व है।
दूसरे शब्दों में, मंत्रों की ऊर्जा का लक्ष्य ब्रह्मांडीय ऊर्जा को आकर्षित करना है। मंत्र द्वारा भूमा सत्ता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का एक तरीका है। योग विज्ञान ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ हमारे बंधन को मज़बूत करने के लिए एक मंत्र पर ध्यान केंद्रित करने पर आधारित है, ताकि हम अपनी क्षमता को पहचान सकें और अपने अंदर छिपी गतिज ऊर्जा (kinetic energy) का उपयोग कर सकें, जिसका उपयोग उच्चतम लक्ष्य को प्राप्त करने की अभिकल्प या रूपरेखा के लिए किए गए रचनात्मक कार्यों के लिए किया जा सकता है।
साधना मे यदि मंत्र के मूल तत्व द्वारा मन को प्रशिक्षित किया जाए तो ब्रह्मांडीय ऊर्जा मनुष्य को नकारात्मक प्रवृत्ति से ऊपर उठा कर सीमित चेतन मन की बेड़ियों से आगे निकाल दिव्यता प्रदान करती है। वे जीवन की अनगिनित समस्याओं को वैसे ही काट सकती है, जैसे एक तेज़ तलवार घास को काटती है। सबसे बढ़कर मुक्ति, मोक्ष या निर्वाण प्राप्त करने का भी यही एकमात्र मार्ग है।
मंत्रों की शक्ति की तुलना लाखों परमाणु हथियारों से की जा सकती है। लेकिन ऐसी शक्तियाँ प्राप्त करने के लिए, आध्यात्मिक मार्ग पर गहन प्रयास के अलावा, मंत्र का आह्वान करने के लिए आंतरिक पवित्रता और शक्ति की आवश्यकता होती है। बुरे इरादों वाला व्यक्ति लंबे समय तक मंत्रों से लाभ नहीं उठा सकता। इसके अलावा, ऐसे साधक न केवल दूसरों को नुकसान पहुँचाएँगे, बल्कि अनंत काल तक घोर अंधकार में डूब जाएँगे।
इसी आशय को ध्यान मे रख कर मंत्र साधना की प्राचीन परंपरा एक गुरु के सख्त मार्गदर्शन में की जाती थी। गुरु जानते हैं कि एक मंत्रज्ञ (मंत्रों के विज्ञान में सिद्ध) ब्रह्मांडीय चेतना में हलचल पैदा करने के लिए काफी है। इसलिए वे अपने दिशानिर्देशन मे आध्यात्मिक साधकों को आध्यात्मिक आतंकवादी नहीं बनने देंगे। वे हमेशा प्रयत्नशील रहेंगे की उनके शिष्यों को योगिक अभ्यासों का संपूर्ण फल प्राप्त हो सके।
एक अच्छे गुरु का चयन और समझना आध्यात्मिक मार्ग में सबसे महत्वपूर्ण घटक है। सिद्ध गुरु टीवी या सोशल मीडिया पर दिखाई नहीं देते। वे बड़े भवन संरचना (मठ) या अपने आस-पास भक्तों की बड़ी भीड़ में शामिल नहीं होते। हर गुरु मंत्र और तंत्र साधना या योग का विशेषज्ञ नहीं होता। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके पास आपको मार्गदर्शन करने के लिए सही ज्ञान भी नहीं हो सकता है। कुछ तथाकथित गुरु बौद्धिक शक्ति के भंडार हो सकते हैं। कुछ संप्रदायों के रक्षक और धर्मों के संरक्षक हो सकते हैं। कुछ महान इंसान हो सकते हैं, जो समाज के लिए बहुत सारे निस्वार्थ काम करते हैं। आप एक सच्चे आध्यात्मिक गुरु को असाधारण भक्ति के अलावा किसी और चीज़ से प्राप्त नहीं कर सकते है।
