मगही महिलाओं के उत्थान के लिए PROUT अनिवार्य है।

श्रीमती शारदा देवी

मगही समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। प्राचीन मगध इसी क्षेत्र की धरती थी, जिसने भारत को मौर्य और गुप्त जैसे महान साम्राज्य दिए। भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की शिक्षाओं से यह भूमि विश्वविख्यात हुई। पाटलिपुत्र ज्ञान, शासन और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बना। नालंदा ने विश्वभर में शिक्षा की प्रतिष्ठा बढ़ाई। मगही भाषा, लोकगीत, लोककथाएँ और परंपराएँ आज भी इस समृद्ध विरासत को जीवित रखती हैं।

 

आज के मगही समाज के निर्माण, संरक्षण और विकास में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। हमारी माताओं, बहनों और बेटियों ने मगही भाषा, संस्कृति और परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखा है। महिलाओं ने सोहर, विवाह गीत, संस्कार गीत, लोकगीत और लोककथाओं के माध्यम से हमारी समृद्ध लोक-संस्कृति को संरक्षित किया। माताएँ और दादियाँ बच्चों को मगही भाषा, लोकाचार, नैतिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों से जोड़ती रही हैं। ग्रामीण महिलाओं ने खेती, पशुपालन, घरेलू उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा सामाजिक एकता को मजबूत किया। विवाह, पर्व-त्योहार और सामुदायिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। आधुनिक समय में मगही महिलाएँ शिक्षा, साहित्य, कला, व्यवसाय, प्रशासन और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। वे दहेज, अशिक्षा और अन्य सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठा रही हैं। वास्तव में, मगही समाज की सांस्कृतिक पहचान को सँजोने और उसके भविष्य को मजबूत बनाने में महिलाओं की भूमिका अद्वितीय और अनिवार्य है।

*“मगही समाज की पहचान केवल उसके इतिहास और पुरुष साहित्यकारों से नहीं बनी; हमारी माताओं, बहनों और बेटियों ने लोकगीतों, संस्कारों, परंपराओं और भाषा को अपनी पीढ़ियों के माध्यम से जीवित रखा है।“

 

मगही समाज की प्रमुख चुनौतियों में  श्रमिक पलायन, मगही भाषा को संवैधानिक मान्यता, किसानों की कम आय और कृषि को उद्योग का दर्जा शामिल हैं। रोजगार के अवसर बढ़ाने, स्थानीय उद्योग विकसित करने, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। इससे रोजगार, कृषि-आधारित उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा तथा मगही समाज का समग्र विकास संभव होगा।

 

मगही समाज में महिलाएँ आज भी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। शिक्षा की कमी, बाल विवाह, दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा प्रमुख समस्याएँ हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता के अवसर सीमित हैं। परिवार तथा समाज के महत्वपूर्ण निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी भी कई बार कम रहती है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और सामाजिक रूढ़ियाँ उनके विकास में बाधा बनती हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षा, जागरूकता, सुरक्षा, समान अवसर और आर्थिक आत्मनिर्भरता आवश्यक है।

 

इन समस्याओं का समाधान PROUT के सिद्धांतों के आधार पर स्थानीय संसाधनों और स्थानीय लोगों को केंद्र में रखकर किया जा सकता है। श्रमिक पलायन रोकने के लिए कृषि आधारित उद्योग, लघु एवं कुटीर उद्योग तथा स्थानीय रोजगार का विकास आवश्यक है। किसानों की कम आय दूर करने के लिए सहकारी व्यवस्था, कृषि-आधारित उद्योग और उचित मूल्य सुनिश्चित किए जाएँ। कृषि को उद्योग का दर्जा देकर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को एकीकृत किया जा सकता है। मगही भाषा के संरक्षण और संवैधानिक मान्यता के लिए शिक्षा, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में इसके प्रयोग को बढ़ावा दिया जाए।

 

PROUT महिलाओं को समाज की समान और महत्वपूर्ण शक्ति मानता है। शिक्षा की कमी दूर करने के लिए सभी लड़कियों और महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए। आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए महिलाओं को रोजगार, कौशल, सहकारी संस्थाओं और स्थानीय उद्योगों से जोड़ा जाना चाहिए। दहेज और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के विरुद्ध सामाजिक जागरूकता और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना आवश्यक है। घरेलू हिंसा के विरुद्ध प्रभावी सामाजिक और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित हो। परिवार, अर्थव्यवस्था और समाज के निर्णयों में महिलाओं की समान भागीदारी हो। PROUT का लक्ष्य ऐसा समाज बनाना है जहाँ महिलाओं की क्षमता का पूर्ण विकास हो और वे सम्मान, सुरक्षा तथा आर्थिक स्वतंत्रता के साथ जीवन जी सकें।