एक• के• अग्रवाल
बचपन मे स्कूल की एक किताब मे बहुत ही शिक्षाप्रद कहानी पढ़ाई गई थी। “Elephant and the six blind men”। हरेक ने अलग अलग हाथी के अंग को छुआ और उसका अपने हिसाब से वर्णन कर दिया। आज भी उस कहानी की शिक्षा हमे याद है। मनसिक स्तर पर इसी प्रकार सभी के पृथक- पृथक विचारधाराएँ हो सकते है जिसकी बाह्य जगत मे अभिव्यक्ति होती रहती है।
याद रखने योग्य बात है की हम जो कुछ भी देखते है, सुनते है, महसूस करते है उससे एक विचार का निर्माण होता है और यही वाह्य जगत मे क्रिया (action) के रूप मे परिलक्षित होता है। हाथी का सम्पूर्ण विवरण किसी ने भी सही रूप से नही किया, क्योंकि किसी ने उसके वास्तविक स्वरुप को देखा ही नही था। अतः जो कुछ भी हमने अपनी ज्ञानिन्दियों की सहायता से अपने दिमाग मे चित्र बनाया वो जरुरी नही है की सही हो। इसी कारण पूज्य बाबा ने तर्कसंगत निर्णय (Rationalistic decision) लेने का सख्त निर्देश दिया है।
हमारे जीवन मे शिक्षा का बहुत बड़ा महत्व है। शिक्षा का चरित्र निर्माण मे अहम् योगदान है। जिस शिक्षा की बात हम कर रहे है, वो किताबों से पढ़ कर कभी भी प्राप्त नही हो सकती है। घर, वातावरण, स्कूल, समाज आदि का हमे शिक्षित करने मे बड़ा योगदान है। बड़ो के अनुभव और आचरण, छोटो पर अत्यधिक प्रभाव डालता है। वे स्वयं ही उनका अनुसरण करने लगते है। परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि शैक्षणिक (academic) रूप से योग्य शिक्षक/अभिभावक शिक्षा की भूमिका और उद्देश्य पूरा कर सकें।
जिन परिवारों मे शिक्षा का आभाव होता है, जिनमे शिक्षा का अलग दृष्टिकोण है, वे शिक्षा के मूल तत्वों को किताबी बात कह कर अस्वीकार कर देते है। ये लोगो उस अंधे के सामान है, जिसने हाथी के एक अंग को पकड़ लिया और महसूस किया की वे ज्ञानी हो गए। आप स्वयं आकलन करे की उनके ज्ञान का स्तर क्या है।
ज्ञान अर्जित करने मे ज्ञानीन्द्रियों का बड़ा महत्व है। वाह्य जगत से अर्जित सूचनाओं को किस स्तर तक आत्मसात (internalize) और मनन (contemplate) किया, इसपर शिक्षा का स्तर निर्भर होगा। जब वाह्य ज्ञान (external knowledge) से आप आंतरिक रूप से संतुष्ट (internally satisfied) होगे तो आपकी प्रगति (progress) होगी।
यहाँ एक बात और बताना चाहेगे। प्रगति और विकास पृथक- पृथक है। जब बोद्धिक स्तर पर विचारों मे clash और cohesion होगा तो इंसान की आंतरिक प्रगति होगी जिसका वाह्य जगत के विकास मे वो योगदान करेगा। यही है progress aur development का अंतर। जिन्होंने भी कुछ बड़ा काम किया है, या श्रेष्ठ पद हासिल किया है उन्होंने knowledge का इसी प्रकार उपयोग किया। Swamy Vivekananda के उदहारण से इसको समझने की चेष्टा करे।
ये अंतिम सत्य को याद रखना चाहये। शिक्षा के मूल तत्व से कभी भी समझौता नही करना, क्योंकि मनुष्य जीवन मे शिक्षा ही धर्म के मार्ग को प्रशस्त करता है। इस सत्य से विपरीत जाना महाविनाश को आमंत्रण देना है।
एक• के• अग्रवाल
