आदिपिता शिव का रहस्यमयी और गौरवमयी इतिहास

जय शुभ वज्रधर शुभ्र कलेवर
व्याघ्राम्बर हर देही पदम्।।
जय विषाणनिनादक क्लेशविदुरक
सर्वाधिधारक देही पदम्।।
जय अदीपिता आदिदेव मंत्रेश महादेव
भावातीत अभिनव देही पदम्।।
रजतगिरिनिभ मधुमय दुर्लभ
आनंद अमिताभ देही पदम्।।
जय सत्य सनातन परम पदम्।।

सर्वप्रथम यह देखा जाए कि “शिव” शब्द का अर्थ क्या है? तंत्र, वेद और जो कुछ मौखिक या लिखित प्रमाण मिलते हैं, उनसे हम “शिव” शब्द के तीन अर्थ पाते हैं। “शिव” का पहला और सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अर्थ है “कल्याण” या “मंगल”। शिव अपने हर रूप में कल्याण करते हैं। बोलचाल की भाषा मे शिव अपने पंचमुख से जगत का कल्याण करते रहते हैं। इसका यह अर्थ नही की शिव के पाँच शीश थे बल्कि उनके कल्याण करने का तरीका ऐसा था जिसके द्वारा उन्हें शास्त्रों में वामदेव, कालाग्नि ये दोनों बाईं ओर, दक्षिणेश्वर और ईशा…