प्रभात संगीत क्रमांक 478

Songs of New Dawn by Shri Shri Anandamurti Ji

 

 

आकाशे चुमकि गाँथा तारा हासे ओइ।

ओइ तारारइ सङ्गे आमि राति जेगे’ रइ गो, राति जेगे रइ।।

 

दमका हाओया देय जे दोला, ढ़ले पड़ि पलाश वनेर गा’य।

उड़ते गिये पाइ जे व्यथा, सबाइ तखन आमाय छेड़े’ जाय।

आबार तारार ओइ झलमलानि देय गो आनि’

नोतुन करे रंगेर रोशनाइ।।

 

चौदिकेते मादल बाजे, सबाइ साजे नाचेर साजे गो।

तार छो देखे आर बाँचि ना, एइ कथा तुइ भुललि केन गो।

मोरे ना घरके निलि घाटके दिलि, एखन आमि कोथाय जाबो बोल।

आज देवता आमार गति गो, जागे भोरेर राते पूर्व आकाशे ओइ।।

 

अर्थ:

आकाश के तारे, गुथे हुए सितारों (चमकीले वस्तु) के जैसे हैं और हँस रहे हैं। उन तारों के साथ मैं रात भर जगा/जगी रहती हूँ।

 

अचानक आये तेज हवा के द्वारा मुझे धक्का दिया जाता है और मैं पलाश के वन में गिर पड़ता/पड़ती हूँ। मुझे उड़ने में कष्ट होता है और तब सभी मुझे छोड़कर चले जाते हैं। अब तारों की झलमलाहट मेरे जीवन में एक नई रंगीन चमक लाकर देती है।

 

चारों ओर मांदल बज रहा है, सभी नृत्यसज्जा में सजे हैं। तुम्हारा छो देखकर मैं अब और नहीं बच पाया/पायी हूँ, यह बात तुम भूल क्यों गये? मुझे न घर का रहने दिया, न घाट का, बोलो अब मैं कहाँ जाऊँ? आज जीवन देवता ही मेरा आश्रय है, देखो भोर में पूर्वकाश में वह जागृत हो रहा है।


सुप्रिया गोस्वामी द्वारा संदर्भित