यह नव वर्ष
नहीं है अपना
इसीलिए कहता हूँ
प्रियवर!
कहीं नहीं
पिकनिक पर जाना
राह चलते
नहीं सीटी बजाना
ना ही बर्गर,
पिज्जा खाना
सर्वदा स्वस्थ
सेहत को रखना
यह नव वर्ष
नहीं है अपना ।
देखो कितनी
सर्द हवा है
दिनमान भी
थर -थर काँप रहा है
चाँद न
भू पर झाँक रहा है
द्रुम -लताएँ कैसे
हाँफ रही हैं ,
बाग -बगीचा,
वन -उपवन,
खलिहान -खेत,
पाला से सना है
फिर “हैप्पी नव वर्ष ”
क्योंकर कहना है?
यह नव वर्ष
नहीं अपना है ।
हम तो कोई
अंग्रेज नहीं हैं
यहूदी से क्रिश्चियन
नहीं बने हैं,
ना तन लुंठित है
ना मन कुंठित है
जय गान असुरों का
नहीं करना है
यह नव वर्ष
नहीं अपना है ।
संरक्षण करें
अपनी सभ्यता
और संस्कृति का,
करें संवर्धन
गौ, गीता, गंगा,
गायत्री का
तथा सत्कर्म सदा
करते रहना है,
“सिर्फ छद्म विषधर
से बचकर रहना है ।
यह नव वर्ष
नहीं अपना है ।
