Prabhat Samgiita No./ प्रभात संगीत क्रमांक 4795

Songs of New Dawn by Shri Shri Anandamurti Ji

 

ए गान थामिबे ना,

ए दाबि दमिबे ना,

पथ बेँधे दिलो आलोकोज्ज्बल,

प्राउटेर प्रेषणा। 

 

 सह्य करेछि युग–युग धरे,

 सह्येर सीमा गेलो भेङ्गे परे,

 दानब आजिओ भ्रुभङ्गि करे,

 नीतिबादी उन्मना। 

 

पूर्ब दिगन्ते अरुण एसेछे,

कालेर कालिमा सरिया ये गेछे,

बिषादेर पर आलोक झरिछे,

आर देरि सहिबे ना। 

 

भावार्थ:

सामाजिक न्याय और कल्याण का आह्वान करता मेरा यह गीत अब कभी नहीं थमेगा और यह माँग दबाए जाने पर भी दमित नहीं होगी। प्रउत के संवेग से, उज्जवल आलोक से प्रकाशित पथ प्रशस्त कर दिया गया है जो समाज को समृद्धि और संपन्नता की ओर ले जायेगा।

युगों-युगों तक हमने अन्याय को सहन किया है, किन्तु सहनशीलता की सीमा अब टूट गई है। आज भी मानव समाज के दानव रुपी अनैतिकवादी भौंहें सिकोड़ रहे हैं और नैतिकतावादी इस अनैतिकता के विरुद्ध अनवरत युद्ध में बेचैन हो रहे हैं।

पूर्वी क्षितिज पर अब आशा और सकारत्मकता रूपी सूर्य की लालिमा दिखाई पड़ रही है, क्योंकि समय के साथ दमन और शोषण का अंधकार छंट चुका है। दुख के बाद अब सुख का प्रकाश व्याप्त है। अब प्रउत सामाजिक आर्थिक सिद्धांत पर आधारित समृद्ध समाज की रचना पूरी करने में और विलम्ब सहन नहीं किया जाएगा।