सुजाता देवी “ऋचा ” भागलपुर
भौतिक माया, तामस धारी
चौपाई छंद
मात्रा 8, 8

भौतिक माया, तामस धारी।
झूठी है ये, दुनियाँदारी ।।
कितनी होगी, और परीक्षा ।
सत्य मार्ग का, दे दो शिक्षा ।।
द्वार खड़ी प्रभु, करूँ प्रतीक्षा।
कर दो मेरी, सही समीक्षा ।।
चरण पकड़ प्रभु, रहूँ तुम्हारी ।
झूठी है ये, दुनियाँदारी ।।
माया बंधन, ऐसा रूठा ।
समय दिखाया, रिश्ता झूठा ।।
तमस वृत्ति मन, खाता जूठा ।
कृष्ण प्रेम मन, सदा अनूठा ।।
कृपा करो अब, ईश हमारी ।
झूठी है ये, दुनियाँदारी ।।
जिनको मैंने, समझा अपना ।
टूटा सारा, मिथ्या सपना ।।
मोह जाल को, अब है तजना ।
कृष्ण भक्ति में, मन को रखना ।
मतलब की थी, सबकी यारी ।
झूठी है ये, दुनियाँदारी ।।
मात्र भरोसा, आज तिहारा ।
चाहु ओर से, थक के हारा ।।
नैनन आँसू, बहती धारा ।
व्यथा क्लेश ने, हमको मारा ।।
नींद उड़ी अब, जीवन भारी ।
झूठी है ये, दुनियाँदारी ।।
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माँ सुनाती हमें वो सदा लोरियाँ
गंगोदक सवैया छंद
सृजन शब्द-लोरियाँ
मापनी- 212-212-212-212,
212-212-212-212
माँ सुनाती हमें वो सदा लोरियाँ,
रात में जागती प्यार से बोलती ।
धन्य है वो जिसे प्यार माँ का मिला,
याद आती हमें जो मुझे खोजती ।।
नींद ऐसी पता ही नहीं रात की,
मात की भावना प्रेम को जोगती ।।
हाथ को थाम के साथ ही साथ थी,
बात ही बात में प्रेम से टोकती ।।
छोड़के मायका डोर बंधे पिया,
वो घड़ी भी कटा प्यार से साजना ।
प्रीत की रीत की डोर कांटा चुभा,
सत्य प्रेमी बना ईश को पावना ।।
देख माया हमें बांधती जाल में,
क्यों फसे झूठ जंजाल में भावना ।।
छोड़ देते यहाँ वो सभी जान लो ,
धर्म साथी बना लें सदा साधना ।।
