आतंक
तोते ने मैना से पुछा
दिन में तू क्यों सोयी है?
मैना बोली तु भी सो जा
“फर्म” विदेशी आयी है.
दिनभर शोर शराबा होगा,
धुएं से दम घुट जायेगा,
गैस विषैली आसमान मे,
तू उड़ कैसे पायेगा?
तोते का पुरुषार्थ जागा,
चला खोजने भोजन वह. .
पंख पसारे आसमान मे
कातर स्वर से रोया वह.
अंत हुआ तोते का जीवन,
मैना ज़ोर से चिल्ल्याई ,
अपने ही घरमें जीने का..
हक़ किसने छीना भाई?
तब से मैना बीच समुन्दर,
आसमान मे उड़ती है,
नहीं रहा अब कोई बसेरा,
दिवा रात्रि श्रम करती है.
आतंको से मुक्ति दिलादो
हर जीवों का धरलो ध्यान. .
हे मानव! तुम मानव हो?
या बने मशीनों से हैवान?
संध्या चक्रवर्ती.
विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर
तुम मेरी प्यारी चिड़िया !!

तुम मेरी प्यारी चिड़िया !!
कैसे गुम तुम हो जाती हो,
गुप-चुप, गुम-सुम सो जाती हो !
अबकी बार मिलो जब मुझको
साथ बच्चों को भी ले लाना,
सूना- सूना अंगना मेरा,
रौनक़ इसमें तुम भर जाना !
नहीं कभी जाओगी अब तुम
मैं भी वादा करती हूँ,
दाना-पानी देकर तुझको,
रखवाली अब करती हूँ !
घर बनाकर तुझको दूँगी,
दाना भी रख जाऊँगी,
डगर-डगर पर रखकर पानी,
तेरी प्यास बुझाऊँगी !
क़िस्से तेरे लगी सुनाने
अब मैं बिलकुल सच्ची हूँ,
तुम याद आ गयी भूली-बिसरी
तारीफ़ें अब करती हूँ !
सबमें तेरा प्यार जगाकर
सही ग़लत का मोल सिखाकर,
सबमें लाड़ जगाऊँगी,
तुम भी अब वापस आ जाना;
हाथों में तुझे खिलाऊँगी !
इठलाती- बलखाती जब तुम
मेरे घर आ जाती थी,
बिना किसी आहट के भी तुम,
चुपके से आ जाती थी;
फिर अपनी चिहू-चिहू से
मुझे जगाकर जाती थी !
याद आ गया तेरा,
सारे कुनबे को भी ले आना,
दाना-पानी संग-संग खाना
भला था तेरे संग जीना !
कितनी ख़ुशियाँ रच जाती तुम
जब भी अंगना मेरे आ जाती,
उल्लास लिए तब मन में ,
तुमसे कितनी बातें मैं कह जाती !
फुदक-फुदक के हर डाली पर
इठलाती बलखाती तुम,
भावविभोर करके हमें
इतनी ख़ुशियाँ दे जाती तुम !
न ज़्यादा माँगा कुछ भी तुमने
दाना-पानी ,छोटा सा आशियाना !
फिर भी देखो लूटा तुमको
ना तुम दिखी फिर कहीं हमको !
छिना बसेरा शाख़ों वाला,
जब पेड़ों को काटा !
बेसुध सा इंसान रहा
तेरा दुख ना जान सका,
दान देना भूल गया सब,
पानी तक तो छीन लिया !
बना बसेरा मानव का ऊँचा
आँगन-वांगन छूटे गये,
दोस्ती तेरी पुरानी मुझसे,
मानव सारे लूट गये !
बहुत याद आती हो अब तुम
मन को कुछ ना भाता है;
था तेरा-मेरा निच्छल नाता
अब समझ में आता है !
अब बैठे हैं तुझे मनाने
अब फिर से तुम आ जाना;
बोझिल से मेरे मन में,
फिर से आस जगा जाना !
तुम मेरी प्यारी चिड़िया,
बस अब तुम वापस आ जाना !!!
बस अब तुम वापस आ जाना !!!!!!!!!!! 🙏🪶❤
अंजू राजेश
20th March 2025 World Sparrow Day
