बात उन दिनों की है: समाज आंदोलन – एक प्रसंग

प्रद्युम्न नारायण सिंह

वह इमर्जेंसी के बाद समय था, जब बाबा ने शोषणविरोधी आंदोलन चलाने का निर्देश दिया था। समाज आंदोलन के साथ ही हर समाज में शोषण विरोधी आंदोलन चलाने की प्रेरणा दी गई  थी

आज 26 जनवरी,  दिल्ली के राजपथ पर झांकियां निकल रही हैं और हम समाज आंदोलन की चर्चा कर रहे हैं, देश की क्षेत्रीय सामाजिक सांस्कृतिक झांकियां ही हमे अपने विरासत के प्रति गौरव से भर देती हैl

इस विरासत को जीवित रखने और संभालने के लिए ही समाज आंदोलन का बिगुल फूंका गया हैl इन इकाईयों को आर्थिक रूप से समृद्ध करना ही होगा वरना ये केवल झांकियों मे ही सिमटी रह जायेंगी और उनकी सर जमीन पर कभी जीवन का उल्लास प्रकट नहीं हो पायेगा, फ्लाइंग बर्ड्स, बिचौलिए जिस तरह इनका शोषण कर रहे है उससे बचने के लिए प्राउट सर्व समाज समिति ने एक कठोर आर्थिक अनुशासन और संदेश दिया है कि प्रत्येक सामाजिक सांस्कृतिक इकाइयों के अपने प्राकृतिक संसाधन हैं उसका अधिकतम उपयोग करते हुए उस क्षेत्र को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाय और क्षेत्र से धन का प्रवाह जो परजीवी शोषकों के द्वारा बाहर भेजा जाता है, उसपर तुरंत रोक लगाई जाय, PROUT ने घोषित कर रखा है कि जिसने अपने निजी आर्थिक हित को क्षेत्र विशेष की आर्थिक हित के साथ जोड दिया है, वही उस समाज के सदस्य होंगे, इसमें जाति, सम्प्रदाय, मत, मजहब की कोई बंदिस नहीं है, बस केवल इतनी सी बात है कि आप वहाँ कमाते हैं, धन अर्जित करते हैं तो उस मुनाफे का निवेश आपको वहीं करना होगा, उसे बाहर ले जाने की इजाजत नहीं होगीl उदाहरण के लिए मै अंग देश की ही बात कहता हूँ, भागलपुर अपने सिल्क उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है, केवल देश में ही नहीं देश के बाहर भी इसकी बडी मांग रही है, अरबों का कारोबार है, लेकिन लगभग सभी मारवाडियों के हाथ में है, भागलपुर डिस्ट्रिक्ट गजेटियर के अनुसार भागलपुर में कानपुर के बाद मारवाडियों की सबसे बडी संख्या थी, लेकिन ये सभी परजीवी हैं, व्यापार से मुनाफे का पैसा बाहर भेजते या निवेश करते हैं, अंगदेश में एक कानी कौडी का निवेश नहीं होता है, सिल्क के कारीगरों को देखिये तो कारीगर नहीं मजदूर दिखेंगे, दिहाडी पर काम करने वाला मजदूर, जिस सिल्क उद्योग से अरबों की कमाई होती है उस सिल्क उद्योग का कलावंत कारीगर दो जून की रोटी ठीक से परिवार के लिए नही जुटा पाता हैl उसका व्यापार करने वाला सेठ अरबों कमाकर धन को बाहर भेज देता हैl

इसी अव्यवस्था और शोषण के खिलाफ यह समाज आंदोलन है, ऐसा ही एक प्रसंग आपके साथ सांझा कर रहा हूंl  इमर्जेंसी के बाद समय था, जब बाबा ने शोषणविरोधी आंदोलन चलाने का निर्देश दिया था। अंगदेश में भी हमलोगों ने यह शोषण विरोधी आंदोलन चलाया और इसकी तीव्र प्रतिक्रिया भी हुईl लेकिन मीटिंग से कोई समाधान नहीं निकला, जूट मंडी में श्रमिकों ने अपनी मांग को लेकर उत्पात मचाया जिसका परिणाम हुआ कि उपाध्याय जी, भोला जी और मुझ पर अनेक गैर जमानती धाराओं में मुकदमा कर दिया गया मुझे इन बातों की कोई जानकारी नहीं थी क्योंकि मै पूणियॉ में था, वहाँ उपाध्याय जी, भोला जी श्रमिकों के आंदोलन की अगुआई कर रहे थे, तीन चार दिनों के बाद भोला जी एफ, आई, आर, और चार्ज सीट की कोपी लेकर पूणियॉ मेरे पास आये और सारी बातों की जानकारी दी, भोला जी कुछ घबराये से थे. मैने पूछा, उपाध्याय जी कहाँ हैं, भोला जी ने कहा , जिस दिन पुलिस वारंट लेकर आई थी उसके बाद ही उन्होने किशनगंज छोड दिया, कहाँ हैं पता नहीं. उपाध्याय जी वैसे हैं तो बडे विस्फोटक किस्म के आदमी लेकिन बिना बथान के बैल की तरह विचरते रहते हैं एक जगह जम कर काम करना उनका स्वभाव नहीं, अब किशनगंज की सारी समस्या भोला जी के सर पर आ गयी और वे घबराये से थे. मैने यथासंभव उन्हे आश्वस्त करने की चेष्टा की, लेकिन उनकी घबराहट दूर नहीं हुई, वे मुझे किशनगंज चलने पर जोर दे रहे थे, उन्हें लग रहा था कि पुलिस उनको किसी भी समय गिरफ्तार करके जेल भेज देगी, दूसरे दिन उनके साथ मै किशनगंज आ गया,भोला जी ने कहा किशनगंज थाने के इंस्पेक्टर नीलम सिंह आपको जानते हैं आप एकबार उनसे मिल लीजिए| मैने कहा, भोला जी,मै उन्हे व्यक्ति गत रूप से नहीं जानता हूँ, फिर पुलिस ने जब चार्जसीट दे ही दिया है तो उनसे मिलने का लाभ ही क्या, अब तो मामला कोर्ट का हो गया| मै किशनगंज के सरकारी वकील श्री ज्योतिन्द्र नाथ साहा से उनके घर पर मिला, भोला जी साथ थे, ज्योति बाबू पूणियॉ जिला स्कूल में साथ थे मुझसे एक साल सीनियर, अच्छे संभ्रांत परिवार से हैं, मुझसे अच्छी निकटता थी, ज्योति बाबू ने कहा मंडी के व्यापारी पानी की तरह पैसा बहा रहे है| तुमलोगों को किसी भी तरह दो चार दिन के लिए भी जेल में डलवाना चाहते हैं, सी, जे, एम, किशनगंज के कोर्ट से जमानत मिलना कठिन है, हलांकि मै विरोध नहीं करूंगा, पैसे से कलम खरीदी गई है| मै सारी बात समझ गया, फिर उसी दिन मै भोला जी को पुलिस से बचने की सलाह देकर पूणियॉ लौट आया| दूसरे दिन सुबह सुबह ही थाने का एक सिपाही मेरे नाम का वारंट लेकर हाजिर हो गया, मैने दस रूपये का टिप देकर धन्यवाद पूर्वक सिपाही को विदा किया, उन दिनों दस रूपये कम नही होते थे, सिपाही ने गदगद होते हुए कहा, हजूर, जमानत ले लीजिए, झूठो परेशान क्यों होते हैं| मैने कहा, हाँ, जमानत जल्दी ही ले लूंगा, उसी दिन शाम को मै पूणियॉ में अपने वकील से मिला, सारी बातें बताई और एफ, आई, आर, तथा चार्जसीट की कोपी भी दिखाई और वहाँ की सारी परिस्थिति से उनको अवगत कराया| उन्होंने कहा कि जमानत की अर्जी तो सी, जे, एम, किशनगंज के कोर्ट मे ही देनी होगी, उसके बाद यहा जिला जज के अदालत में मै देख लूंगा| मैने कहा कि किशनगंज कोर्ट से जमानत की अर्जी खारिज हो जायगी, व्यापारियों ने बहुत पैसा खर्च किया है, एक दिन के लिए भी मुझे वे लोग जेल में देखना चाहते हैं, वकील साहब सोचने लगे| मै भी मन ही मन बाबा से प्रार्थना करने लगा कि बाबा, आप जानते है, मुझे जेल जाने से डर नहीं लगता, इमरजेंसी के खौफनाक दिनों में जेल भोगवा कर आपने जेल का खौफ तोड दिया है, लेकिन यदि अभी मै जेल चला गया तो शोषकों का मनोबल बहुत बढ जायगा, यह मेरे मान अपमान का सवाल नहीं है, जो छोटा सा मेरा अहंकार आपने शेष रखा है वह तो आपका ही काम करता है, अब जैसी आपकी इच्छा, बस इतनी ही प्रार्थना मैने बाबा से मन ही मन की| तबतक वकील साहब ने कहा, अच्छा कल आईये, हमलोग जिला जज की अदालत में जमानत की अर्जी दाखिल करेंगे, देखते है क्या होता है| दूसरे दिन मेरी जमानत की अर्जी जिला जज के अदालत में दी गई, जज साहब ने देखा, पढा और कहा कि यह तो सी, जे, एम, किशनगंज के कोर्ट का मामला है, वहाँ की सुनवाई के बाद ही आपको यहाँ आना चाहिए, मै चुपचाप कोर्ट में खडा था, वकील साहब ने किशनगंज की परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपने तर्क प्रस्तुत किये और कहा कि वहाँ मेरे मुवक्किल को न्याय नहीं मिलेगा, जज साहब ने कहा वहाँ से पहले आईये तो, वहाँ आपको न्याय नहीं मिलेगा तो मै देखूंगा| इसपर पुन: मेरे वकील साहब ने अनुरोध किया, हुज़ूर कम से कम अपना ओबजर्वेसन दे दीजिए, जज साहब ने मुस्कुरा कर मेरी ओर देखा और अपने आर्डर मे लिखा, – “इस जमानत की अर्जी को सी, जे, एम, किशनगंज के कोर्ट मे दाखिल किया जाना चाहिए, वहाँ के बाद ही आरोपी को यहाँ आना चाहिए, मुझे लगता है कि मामले को सहानुभूति पूर्वक देखा जाना चाहिए”, बाबा की कृपा ने बहुत बडा काम कर दिया| सर्टिफायड कोपी लेकर मै दूसरे दिन ही किशनगंज चला गया, भोला जी को उसी दिन खबर कर दिया था कि वकील से जमानत की अर्जी दाखिल करवा दें, मै पहुंचा तो कोर्ट खचाखच भरा था, विरोधी खुश थे कि जमानत खारिज होनी ही है, जेल वालों से भी उनलोगों ने मुलाकात कर रखी थी, बहस हुई, हमारे वकील ने जिला जज का आबजर्व किया गया आर्डर सी, जे, एम, के टेबल पर रख दिया| उसकी कापी मै पहले ही सरकारी वकील ज्योति बाबू को दे चुका था, मजिस्ट्रेट ने सरकारी वकील से पूछा, सरकारी वकील ने कहा, इसपर अब क्या बहस कर सकता हूँ- जब जिला जज ने अपने आबजरवेसन में कहा है कि सहानुभूति पूर्वक सुना जाना चाहिए| हमलोगों की जमानत हो गई, विरोधियों के मनसूबे टूट गये, परम पिता बाबा की जय, बाबा ने एकबार मुझसे कहा था कि गुरू की सलाह और कोर्ट की सलाह भी आदेश होता है, इस घटना को मैने विस्तार से इसीलिए लिखा कि भक्त बाबा की कृपा की अनुभूति करें कि कैसे जो नहीं होने वाला काम है वह उनकी कृपा से पलक झपकते ह़ो जाता है|

प्रद्युम्न नारायण सिंह