प्रभात संगीत क्रमांक 0127 (नववर्ष गीत) : https://youtu.be/K3-U0DQLl7M?si=TsEQh5mZUD8V1VG9


Songs of New Dawn by Shri Shri Anandamurti Ji

प्रभात संगीत क्रमांक 0127 (नववर्ष गीत)

https://youtu.be/K3-U0DQLl7M?si=TsEQh5mZUD8V1VG9

एक नूतनेर सुर आजि बाजलो,

फुले फुले दोला दिये,

धरित्री नव साजे साजलो,

सव क्लेश-व्यथा दिलो भुलिये।।

आज सुमुखे चलार पथे नेइ कोन बाधा,

कण्ठभरा गान एकइ सुरे साधा।

आज भेद भुले’ मिले’ मिशे’ एगिये चलो हेसे

(चलो) सवाइ के सङ्गे निये।।

नृत्येर छन्दे अमित आनन्दे,

पराणेर परागेर सुरभित गन्धे,

नववर्षेर एइ हर्षेर परिवेशे,

से गो कोथा’ सवारे ये

दिलो नाचिये, दिलो मातिये।।
भावार्थ:
एक नवीन सुर-ताल आज बज रही है, पुष्प भी नवीन छन्द में दोलायमान हैं, धरती नये रूप में सज गयी है, सभी दुख–क्लेश भूला दिये हैं।

आज उन्नति की राह में कोई बाधा नहीं है, सबका कण्ठ एक ही सुर में गान गा रहा है। आज सबको साथ लेकर सब प्रकार का भेद भूलाकर हँसते हुए आगे बढ़ना है।

नृत्य की लय में, असीम आनंद के साथ, जीवन पराग की सौंधी सुगंध में, नये साल की खुशी भरी इस माहौल में, वह कहाँ है जिसके लिए हर दिल नाचता है, हर मन मदहोश हो जाता है?