प्रभात संगीत क्रमांक 63
दीपावली साजायेछि, प्रभु,
तोमारे करिते वरण।
एसो तुमि हृदि माझे निति निति नव साजे
धीरे धीरे फेलिया चरण।।
एसो तुमि मन माझे आरो गाने आरो नाचे
मृदु हासि करि’ विकिरण।।
एसो तुमि भावलोके छन्दे ओ नवलोके
जागाये मोहन स्पन्दन।।
अर्थ:
प्रभु, मैंने तुम्हें वरण करने के लिए दीपक की कतारों से आज अपना घर सजाया है।
तुम हल्के-हल्के कदम रखते हुये नये-नये रूपों में बार-बार मेरे हृदय में आते रहो।
अपनी मधुर हँसी बिखेरते हुए और भी अधिक गीत और नृत्य के साथ मेरे मन-मन्दिर में आओ।
मेरे भावलोक में मोहन स्पन्दन जगाते हुए अपनी नयी आभा के साथ अवतरित होओ। प्रभु, मैं दीपक की कतारों से घर सजाकर, तुम्हें वरण करने का इन्तजार कर रहा/रही हूँ।
