प्रभात संगीत निष्ठा है आस्था है मानव मन की
शान्तिनिकेतन है स्थायी व्यथित मानो के आँगन की
ताल छन्द रस राग मधुरता रोग निवारक गुण इसके
इसकी गोद में चैतन्य का सुख है भरलो अपने आँचल में
मायारुपी भवसागर पार करने का उपाय यही
परम चेतना से आलिंगन बद्ध होने का उपाय यही
विश्व बंधुत्व प्रउत की व्याख्या नव्य मानवतावाद की पुकार
इसमें रमकर अपना जीवन सार्थक करलो सार यही
जीवन के स्वर्णिम प्रभात को लय ताल में बद्ध करो
इस संगीत की सुर बेला में अपने मन को साध करो
दीप्तीमा
स्तब्ध माता पिता
स्तब्ध माता पिता
पुत्री को अब कभी न देख पाने की टीस
उसके पायल की आवाज अब न गूंजेगी
बेटे की कलाई में अब न राखी बंधेगी
आंगन में हलचल महसूस नहीं होगीस्तब्ध माता पिता
व्यभिचार की बिटिया हुई शिकार
अब हमेशा के लिए माँ हुई बीमार
परिजनों के आंसू अब न सुखेंगे
बिटिया की आहट अब न सुनेंगेस्तब्ध माता पिता
किस समाज में रहते हैं?
किसको अपना कहते हैं?
क्या न्याय की सच में आस है?
इसे दिलाने सच कौन पास है?स्तब्ध माता पिता
एक सवाल है समाज से
बीते कल और आज से
अन्तर्जातीय विवाह पर कितना आक्रोश !
फ़िर पाशविक घटनाओं पर क्यों खामोश?
स्तब्ध माता पिता………गौतम प्रधान ‘मुसाफ़िर’
केलो विहार रायगढ़ (छत्तीसगढ़

