Songs of New Dawn by Shri Shri Anandamurti Ji
आये हो तुम, युगों के बाद प्यारे।
पपीहा बोले, कोयल बोले, बोलते हैं मोर मोरे ।।
जिन दिनों से लीला तुम्हारी,
उन्हीं दिनों से पुकार मेरी।
रोती हैं अँखियां आँसू भरी,
झूमते हैं मन सारे ।।
है नहीं मेरी तपस्या,
इंजोर नहीं है अमावस्या।
रह गयी सिर्फ एक ही चिकीर्षा
बनूं चरण-रजकण तुम्हारे ।।
भावार्थ:
मेरे प्यारे महासम्भूति! आज युगों के बाद तुम्हारा शुभागमन हुआ है। तुम्हारे आने की खुशी में मेरे मन का मोर नाच रहा है, कोयल कूक रही है, पपीहा मीठे स्वर में पुकार रहा है।
हे प्रभु! जब से तुम्हारी लीला का खेल शुरु हुआ है, तब से ही मैं भी तुम्हें पुकार रहा हूँ। आज सब की आँखें आँसुओं से भरी हैं और मन तुम्हारे दर्शन के लिये झूम रहे हैं।
प्रभु, मैंने तुम्हारे लिये कोई तपस्या नहीं की है, मेरे जीवन में उजाला नहीं है, उलटे अमावस्या का अंधेरा है। पर मेरे दिल में एक चाह रह गई है। मेरी सुनोगे न प्रभु? काश मैं तुम्हारे चरण कमल की धूल का एक कण बन पाता।
