Songs of New Dawn By Shrii Prabhat Ranjan Sarkar
Esecho ámára hrdaye esecho
Anala jváláy dagdha hiyáy
Shiitala samiire esecho
Rudrera rańasáje marur vahnimájhe
Ashanira nirghośe dambhera udghośe
Puśpera madhurimá bhare diyecho
Shuśka trńa káṋde hatáshár agaorave
Ashruhárá se je nirbháśe niirave
Sab háránor sheśe páoyári ulláse
Vishvatáńe táte sur bharech
हे प्रभु, अग्नि की ज्वाला से दग्ध मेरे हृदय में तुम शीतल समीर की तरह आए। मेरा हृदय प्रदेश तो मरु प्रदेश की तरह सूखा था जिसकी तपिश में मेरा दंभ मुझे जला रहा था। तुमने वज्र निर्घोष ध्वनि से उसे क्षत–विक्षत कर मेरे हृदय में फूलों का मधुर बहार ला दिया। एक शुष्क तृण की तरह जिसका कोई गौरव नहीं होता, निराशा और हताशा ही उसकी नियति होती है। अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए भाषा भी जिसका साथ नहीं देती, व्यथा भार से दग्ध पलकें भी गीली नहीं हो पाती। हे मेरे प्रभु, तुमने उन सारे अभावों को, टूट चुके अरमानों को खुशियों से भर दिया, उल्लास से प्लावित कर दिया, विश्व गान के तान और सुरों से भर दिया।
