A’nandam

काव्य

एक देवता
एक देवता फिर से 
धरती पर कम हो गए, 
सुन हृदय में तीर लगे 
हज़ारों आँखें नम हुए,
घर परिवार जिनका होता मिशन
दूर सारे उनसे जग के व्यसन, 
सेवा साधना त्याग की
कसौटी पे हर बार खरे उतरे, 
सादगी समर्पण जीवन धरम
निष्ठा ईमानदारी से करम किए। 
एक देवता फिर से…
क्रूरता बर्बरता की हदें‌ पार कर 
कुछ लोग बेरहम बने, 
ज़ख्मी कर डाला तन बदन को
कैसी मर्दानगी ये कैसे दबंग हुए, 
मानव-मानव भाई-भाई 
के जयकारे को वे दफन किए। 
एक देवता फिर से… 
बाबा की संगीता

शोषण

इतिहास बताता शोषण का क्रम,
किसने किसको चूसा है।
सत्ता की मोटी चक्की ने,
शासित को ही पीसा है॥

शासित जब शासक बन बैठा,
पलट सर्प का ज़हर दिया।
दमन चक्र का क्रम बह निकला,
शोषण ने तब जनम लिया॥

क्षत्रिय ने शूद्रों को कुचला,
बना सिपाही मारा है।
विप्रों ने सत्ता में आकर,
तीनों को ललकारा है॥

बौद्धिक शोषण हुआ अधिकतर,
युक्तिहीन जड़ता आई।
विश्वासों के अंधे बल पर,
‘नारी’ दासी कहलाई॥

पूँजीपतियों के युग में फिर,
आर्थिक दमन चक्र आया।
जमकर शोषण हुआ सभी का,
भौतिकता का युग आया॥

चली मुनाफाखोरी खुलकर,
नैतिकता का पतन हुआ।
तानाशाही जमकर बैठी,
मानवता का अंत हुआ॥

शोषण ने शोषित के ऊपर,
जाल बिछाया मुद्रा का।
भरा अँधेरे से मानव-मन,
युग आया तब निद्रा का॥

जागो हे क्षत्रिय जागो,
अब शूद्र वैश्य सब जग जाओ।
जागो सद्विप्रों उठकर अब,
आध्यात्मिक गुण अपनाओ॥

तभी हटेगा शोषण युग का,
सभी विषमता जाएगी।
सबको रोटी तभी मिलेगी,
पूँजी जब बंट जाएगी


 

दोहा छंद
विषय–ईश्वर प्रणिधान

भाव श्रयी मन की दशा,करें ईश प्रणिधान ।
जाप श्रेष्ठ है मानसिक, भक्त हृदय पहचान।।

योग साधना जो करें, चित्त शांत प्रभु लीन ।
धर्म ज्ञान को प्राप्त कर, दया भाव रख दीन ।।
परम सत्य का खोज कर, जीवन सार्थक जान।
जाप श्रेष्ठ है मानसिक, भक्त हृदय पहचान ।।

 

केंद्र बिंदु हिय मंत्रजप, परम पुरुष की ओर।
परा भक्ति ही धर्मपथ, पकड़े प्रभु की डोर ।।

नित्य करो तुम साधना, सुंदर कीर्तन गान ।
जाप श्रेष्ठ है मानसिक, भक्त हृदय पहचान ।।

सात्विक मन की भावना, सही ईश प्रणिधान ।
तमस वृत्ति को दूर कर, मानवता को जान ।।
नव मानवतावाद ही, करें सबका कल्याण।
जाप श्रेष्ठ है मानसिक, भक्त हृदय पहचान।।

सुजाता देवी भागलपुर
9798426931
ईश्वर प्रणिधान पर कविता


 

 

Nightmare

Sitting under a tree in a meadow

with green grass under my feet

Cool breeze kissing my face

I slipped into a dream…

Saw all beings dancing together

elated and unveiled…

Cuckoo singing the song of love

River flowing unassailed…

Before I could fathom what it was

Some familiar noise

jostled me up…

What met my eye

shook me to my core

Witnessed humans killing humans

for greed power and

wealth to devour…

Trees were being battered

to serve their material need

Animals put on alter for gods to

please… This is Adharma

 I cried out loud

What is then Dharma

I . .. Slipped inbound..

Dharma is our sole company,

Dharma is eternal truth

Dharma is our life divine,

Dharma the elixir of our karmic fruit Dharma is ultimate refuge

Dharma is solace

Dharma is the pivot,

along which the

entire creation resonates…

Deeptima