प्रभात संगीत क्रमांक 775

Songs of New Dawn by Shri Shri Anandamurti Ji

प्रभात संगीत क्रमांक 775

आमार जीवन धन्य करेछो

तोमारअपार प्रीति ढेले

नन्दित करे छन्द भरेछो

तोमार अतुल लीलाछले

       ममतार  मधु एनेछिले बंधु

      आमार भाराते भावलोके शुधु

    हिया उपचिया उत्सर्जिया

   अफुरन परान भोरेछिले

चाओ नाय किछु नाओ नाय  किछु

शत दोष  जेने भावो निको नीचे

चलिते बले छो पथ  धरे ऋजु

ज्योतिर धाराय झरेछिले

अनंत दीप ज्वलेछेले (तुमि)

 

 

हे मेरे प्रियतम,

तुमने तो  मेरे जीवन को धन्य कर दिया।

तुम्हारे अपार प्रेम  की नांदनिक अनुभूति ने मेरे जीवन को छंदमय कर दिया है।

आज तुम्हारे नन्दनवन में तुम्हारे छंदों पर नृत्य कर रही हूँ।

मेरे अंग अंग तुम्हारे छंदों पर नृत्यरतंद है।

तुम्हारी अपरम्पार लीला का कोई  अंत नहीं ।

तुम्हारे छंद तो मेरे नृत्य में ही व्यक्त हो रहे हैं।

आंतरिक आनंद की अभिव्यक्ति का दूसरा कोई  उपाय नहीं।

 

     हे मेरे प्रियतम,

मेरे भावलोक को अपनी ममता के मधु से आप्लावित कर दिया है।

तुम्हारे प्रेम से मेरा हृदय उच्छल है,निर्मल है।

अब मेरे लिए  कोई  पराया नहीं।सभी तो अपने ही अस्तित्व के अंग हैं।

मेरे प्राणों को तुमने भर दिया मेरे प्रियतम।

     तुमने तो मुझसे कभी कुछ नहीं चाहा,कुछ भी तो नहीं लिया।

यह जानते हुए कि मुझमें अनेक दोष हैं,अनेक कमजोरियां हैं,तुमने कभी मेरी उपेक्षा नहीं की।कभी प्रताड़ना नहीं दी।

 

तुमने केवल यही कहा—

आगे बढते जाओ,दोषों को देखने की जरूरत नहीं,केवल अपने अनंत लक्ष्य की ओर देखो और चलते रहो,चलते रहो।

सरल पथ का अनुसरण करते हुए नहीं प्रकाश की तरफ केवल तुमको चलते जाना है।

भूतकाल क्ह पश्चाताप नहीं,भविष्य की कोई  चाहना नहीं।अनंत दीपशिखा के आलोक की ओर केवल बढते चलो।वही तुम्हारा दिव्यधाम है,वहां पहुंचना ही तुम्हारा एकमात्र लक्ष्य है।

    

ममत

    प्रद्युम्न  नारायण सिंह द्वारा ।