पत्तों से उपचार – एक अनुभव : सत्यवती सिंह

पत्तों से उपचार-एक अनुभव

पादपविज्ञान प्रत्येक मनुष्य एवं जीव को किसी न किसी प्रकार से प्रभावित करता है। अत्याधुनिक भयानक संक्रमण से पीडित रोगियों का उपचार प्राकृतिक पत्तों (पौधे तथा पेड़ों के पते) के प्रयोग से कारगर हुआ है।

पत्ते रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सक्षम हैं प्रकृति ने मानव व पशु समाज में होने वाले रोगों का उपचार उसी के आस-पास दिया है किन्तु  आलसी और आरामतलब मनुष्य आँख खोलकर देखना ही नहीं चाहता है। नीम,  तुलसी,  सहजन, बेल कालमेघ, पपीता, नयनतारा, अश्वगंधा शतावर मीठीनीम (करीपत्ता) आदि पेड-पौधे मनुष्य के समीप स्थित है किन्तु रोगों से छुटकारा प्राप्त करने में समर्थ नहीं है

जन सामान्य में प्रचलित महा औषधि तुलसी श्वसन तन्त्र की बीमारियों से मानव को निजात दिलाती है साथ ही खाँसी एवं बलगम को निकालने का कार्य करती हैं। तुलसी पत्तों से बना हुआ काढ़ा श्वसन-तन्त्र की बीमारियों जुकाम, खाँसी, अनिद्रा एवं रक्त की कमी आदि के लिए अत्यधिक कारगर सिद्ध  होता है। तुलसी पत्ता दमा (अस्थमा), इन्फ्लुएन्जा,  वायरल इन्सेफ्लैटिस आदि के लिए भी कारगर सिद्ध होता है। श्यामा तुलसी पत्ते कफ विकार को दूर करने सक्षम है।तुलसी में एन्टीबॉयटिक तथा  एन्टी आक्सीडेन्ट के गुण है।

गिलोय के पत्ते तथा तने का काढ़ा शहद के साथ पीलिया व ज्वर में लाभकारी होता है। यह कफ,  पित्तशामक तथा सूजन में भी लाभकारी होताहै।

एलोवेरा (घृतकमारी) चमत्कारी गुणों से परिपूर्ण है। वृहद सौन्दर्य प्रसाधन, वैकल्पिक औषधियों, त्वचा विकार जलन, घाव, त्वचीय प्रदाह संक्रमण के उपचार में अत्याधिक उपयोगी है।

 

बाँस के पत्तों को पानी में डुबाकर रखने और दूसरे दिन प्रातः पानी को छानकर पीना मधुमेह रोग की अच्छी औषधि है। बथुआ, पालक, चौलाई, मेथी, ब्रह्मी, धनिया, और पुदीना और कूलोकाढ़ा आदि के पत्ते विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए प्रयोग किए जाते हैं। उदाहरणस्वरूप पालक और चौलाई साग आइरन और कैल्शियम के लिए शरीर में उपयोगी है।


मेथी
और बथुआ के पत्ते, सब्जी के रूप में प्रयोग करते हैं शारीरिक शक्ति वर्धन, कमर दर्द के निवारण तथा हृदय रोग तथा नसों के ब्लाकेज को कम करने में सहायक है।अश्वगंधा के पत्तों  का  वजन कम करने  के लिए प्रयोग‌ किया जाता है । हरसिंगार  (शिवली) के पत्तों का प्रयोग बढ़े हुए मोटापे को घटाने तथा रक्तचाप के नियमन के लिए किया जाता है।कालमेघ, नीम,  बेल, जामुन और अमरूद के पत्तों का नियमित व निश्चित मात्रा में प्रयोग मधुमेह के लिए बहुत उपयोगी है।

 

अकन्द के पत्तों में अनेक औषधीय गुण् है किन्तु स्वाद के कारण पत्तों की औषधीय गुण को जानते हुए भी उपयोग नहीं करते है। कभी-कभी पत्तों की उपलब्धता की भी समस्या होती है।

 

आदिकाल से मनुष्य पत्ते, जड़,  कंदमूल, छाल और तने आदि के प्रयोग से अपने स्थास्थ्य को बनाए रखने के लिए प्रयोग  करता था किंतु आधुनिकता के दौर में अपने पर्ण औषधि विज्ञान से अनभिज्ञ मानव एलोपैथिक दवाओं का सेवन कर एक   बीमारी से मुक्ति पाता तो दूसरी बीमारी को side effect के रूप में न्योता देता है।

 

अधिक जानकारी श्री प्रभात रञ्जन सरकार की पुस्तक  यौगिक चिकित्सा एवं समन्वित चिकित्सा निर्देशिका में पत्तों के सम्बन्ध में उपलब्ध हैं।

 

सत्यवती सिंह

ग्रेटर नोएडा