मानवीय धर्म और कर्म ++++++++++++++ देख प्रेम से सारी दुनिया, बहे प्रेम की धार हो ।...
रंग बिरंगी होली : सब रंग में ईश्वर एक, मानवता एक होली के अनेक रंगों में...
मेरे गाँव की बयार मेरे गाँव की बयार, मेरे कानों में आकर मानों पूछती है मुझसे,...
अति-संचय संचय मानव का स्वभाव है, अति संचय अन्याय का घर। उतना ही जोड़ो धन को तुम,...
आतंक तोते ने मैना से पुछा दिन में तू क्यों सोयी है? मैना बोली तु भी सो जा "फर्म"...
वटवृक्ष गौतम प्रधान 'मुसाफ़िर' अपने शाखाओं प्रशाखाओं से रखता स्वयं को...