किसान

सारे जग में व्याप्त है महंगाई का दौर । मुश्किल से ही प्राप्त हो अब तो भैईए...

नव वर्ष

यह नव वर्ष नहीं है अपना इसीलिए कहता हूँ प्रियवर! कहीं नहीं पिकनिक पर जाना राह...